वाराणसी: ‘विंग्स ओवर गंगा’ में दिखा वायुसेना का शौर्य, काशी की संस्कृति से जुड़े 25 फॉर्मेशन

वाराणसी: बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में रविवार को आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो में भारतीय वायुसेना की ताकत के साथ देश की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक भी देखने को मिली। गंगा के ऊपर विमानों की गर्जना के बीच ‘ओमकार’, ‘रुद्र’, ‘भागीरथी’, ‘त्रिदेव’, ‘महादेव’, ‘विश्वनाथ’ और ‘नीलकंठ’ जैसे नामों वाले विशेष फॉर्मेशन आकर्षण का केंद्र बने। भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुए इस प्रदर्शन में काशी की आध्यात्मिक पहचान, पौराणिक परंपराओं और राष्ट्ररक्षा के संकल्प को एक साथ प्रस्तुत किया गया।

25 विशेष फॉर्मेशन में दिखा हवाई कौशल

एयर शो के लिए विमानों और हेलीकॉप्टरों के 25 विशेष फॉर्मेशन तैयार किए गए थे। इनके नाम काशी, भगवान शिव, पौराणिक परंपराओं और पवित्र नदियों से प्रेरित रखे गए। ‘ओमकार’ फॉर्मेशन में तीन एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज और वायुसेना का ध्वज लेकर उड़े। वहीं, ‘गंगा’ फॉर्मेशन में तीन चेतक हेलीकॉप्टरों के जरिए पुष्पवर्षा की गई।

भगवान शिव के स्वरूप से प्रेरित ‘रुद्र’ फॉर्मेशन में सुखोई-30 एमकेआई ने उड़ान भरी। ‘भागीरथी’ फॉर्मेशन में स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर और अपाचे हेलीकॉप्टर हीरे के आकार में उड़े। ‘त्रिदेव’ फॉर्मेशन में थलसेना, नौसेना और वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने एक साथ उड़ान भरकर तीनों सेनाओं के समन्वय का प्रदर्शन किया।

महादेव, विश्वनाथ और नीलकंठ के नाम पर फॉर्मेशन

एयर शो में भगवान शिव और काशी की धार्मिक पहचान से जुड़े नामों ने भी विशेष आकर्षण पैदा किया। ‘कैलाश’ फॉर्मेशन में चिनूक और एएलएच हेलीकॉप्टर शामिल रहे, जबकि ‘भैरव’ में सी-295 और डोर्नियर विमान ने उड़ान भरी। ‘त्रिलोचन’ फॉर्मेशन में एईडब्ल्यूएंडसी विमान के साथ मिग-29 शामिल हुआ।

‘नटराज’ फॉर्मेशन में नौसेना का पी-8आई और मिराज-2000 विमान शामिल रहे। ‘महादेव’ फॉर्मेशन में हवा में ईंधन भरने वाला आईएल-78 विमान तीन मिराज-2000 के साथ उड़ा। वहीं, ‘विश्वनाथ’ में तीन सुखोई-30 एमकेआई, ‘पशुपति’ में चार जगुआर और ‘नीलकंठ’ में तीन राफेल विमानों ने अपनी हवाई क्षमता का प्रदर्शन किया।

काशी, सारनाथ और अस्सी के नाम भी आसमान में गूंजे

एयर शो में स्थानीय पहचान और पौराणिक विरासत से जुड़े नाम भी शामिल किए गए। ‘काशी’ फॉर्मेशन में तीन किरण विमानों ने विजय के प्रतीक ‘वी’ आकार में उड़ान भरते हुए आसमान में तिरंगे के रंग बिखेरे। ‘वरुण’ फॉर्मेशन में हेलीकॉप्टरों के जरिए रस्सी के सहारे जवानों को उतारने की क्षमता प्रदर्शित की गई।

‘केदार’ फॉर्मेशन में राफेल और ‘हनुमान’ में सुखोई-30 एमकेआई ने उड़ान भरी। ‘सारनाथ’ फॉर्मेशन में ऐतिहासिक हार्वर्ड विमान ने हवाई कौशल दिखाया, जबकि ‘अलकनंदा’ में चिनूक और एएलएच हेलीकॉप्टर शामिल रहे। ‘दशाश्व’ फॉर्मेशन में सी-17 ग्लोबमास्टर ने नौ हॉक विमानों वाली सूर्यकिरण टीम का नेतृत्व किया। स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस ने ‘अस्सी’ नाम के साथ अपनी हवाई क्षमता का प्रदर्शन किया।

धार्मिक परंपराओं और सैन्य शक्ति का संगम

इन फॉर्मेशन के नाम काशी की सांस्कृतिक पहचान, गंगा और हिमालय की नदियों तथा पौराणिक परंपराओं से जुड़े हैं। ‘ओमकार’ आध्यात्मिक चेतना, ‘भागीरथी’ गंगा के धरती पर अवतरण की परंपरा और ‘त्रिदेव’ सृजन, पालन व संहार की अवधारणा का प्रतीक है। वहीं, ‘नीलकंठ’, ‘विश्वनाथ’ और ‘पशुपति’ जैसे नाम भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों और धार्मिक परंपराओं को दर्शाते हैं।

तेजस ने दिखाया आत्मनिर्भर भारत का सामर्थ्य

एयर शो में स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस का प्रदर्शन भी खास रहा। तेजस ने अपनी गति, फुर्ती, सधे हुए मोड़ों और एरोबैटिक करतबों के जरिए दर्शकों का ध्यान खींचा। इसके प्रदर्शन के माध्यम से भारत में विकसित रक्षा तकनीक और स्वदेशी विमान निर्माण क्षमता की भूमिका को रेखांकित किया गया।

तेजस की उड़ान ने भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता के साथ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में देश के प्रयासों को भी प्रदर्शित किया। आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और स्वदेशी निर्माण के मेल से भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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